विधायक-पूर्व विधायक हुए आमने-सामने, इटावा के बाद सीतापुर में अगड़ा,पिछड़ा,दलित के बीच विवाद होते-होते बचा !

यूपी के इटावा में कथावाचक को लेकर जातीय राजनीति का हंगामा अभी थमा भी नहीं कि सीतापुर में बिजली तार बिछाने को लेकर अगड़ा, पिछड़ा और दलित जातीय राजनीति का मामला बनते-बनते रह गया। बिजली केबिल बिछेगी या नहीं बिछेगी के विवाद पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायक और पूर्व विधायक को मौके पर पहुंचना पड़ा। अधिकारियों और भारी पुलिस बल को घंटो पसीना बहाना पड़ा जिसके बाद यह तय हो सका कि पूरे गांव में 55 एमएम का बिजली केबिल डाला जायेगा। इसके बाद आक्रोशित लोग शांत हुए और विधायक व पूर्व विधायक वापस लौटे तब जाकर अधिकारियों ने राहत की सांस ली। इस बीच जिन्दाबाद और मुर्दाबाद के नारे भी लगे। यह वह गांव है जहां पिछले करीब डेढ़ महीने से लाइट हीं नहीं आयी है।
सीतापुर के पिसावां थाना इलाके के 2500 आबादी वाले गड़ासा गांव में पिछले करीब 45 दिनों से बिजली नहीं पहुंच रही है। एक तो भीषण गर्मी दूसरे बिजली के गुल होने से लोग बिलबिला उठे। इससे पहले विधायक शशांक त्रिवेदी ने गांव में केबिल डाले जाने के लिए एक पत्र भी विद्युत अधिकारियों को लिखा। इधर गांव के लोग आक्रोशित होकर 25 जून को देवगवां पावर हाउस पर धरने पर बैठ गए। समर्थन में सपा के पूर्व विधायक अनूप गुप्ता भी पहुंच गए जिसके चलते विद्युत विभाग के अधिकारियों को मौके पर पहुंचना पड़ा और बिजली सप्लाई चालू करने का आश्वासन देना पड़ा। 27 जून को विद्युत विभाग के कर्मचारियों ने पहुंचकर 95 एमएम का तार दो खंभो पर चढ़ा दिया। 28 जून को जेई राजेश कुमार गौतम और टेक्नीशियन अजीत पाण्डेय फिर गांव पहुंचे और खंभो पर चढ़ाए गए तार को यह कहकर उतारने लगे कि इसको पंचायत भवन से जोड़ा जायेगा। अब 55 एमएम का तार इधर लगाया जायेगा। यहीं पर विरोध शुरू हो गया। पहले 2500 की आबादी वाले इस गांव में रहने वाले जातिवार आंकड़े को जान लेते हैं। यहां सबसे ज्यादा करीब 1500 की आबादी राठौर समाज की है। इसके बाद 250 के आस-पास दलित, 150 पाल इतने ही पासी और धोबी, ब्राम्हण, क्षत्रिय, वैश्य, भुर्जी, नाई, मौर्या और मुस्लिम की आबादी मिलाकर 250 के आसपास होगी। केबिल को लेकर जब विवाद शुरू हुआ तो महोली से भाजपा विधायक शशांक त्रिवेदी गड़ासा गांव पहुंच गए। ग्रामीण यहां पर अपनी जिद पर अड़े थे जिन्हें विधायक समझाने में लगे थे। यहां मामला अगड़े पिछड़े और दलित दो फाड़ में हो गया। हालातों को देखते हुए मिश्रिख एसडीएम शैलेन्द्र कुमार मिश्रा, सीओ महोली दीपक कुमार सिंह, अधिशासी अभियंता देवेन्द्र कुमार के अलावा पिसावां, महोली, मिश्रिख थानों के प्रभारी मयफोर्स मौके पर पहुंच गए। 

महोली से पूर्व विधायक और सपा के राष्ट्रीय सचिव अनूप गुप्ता भी गड़ासा गांव पहुंच गए। और पीडीए के साथ अन्याय होने को कहने लगे। पूर्व विधायक अनूप गुप्ता की मिश्रिख एसडीएम शैलेन्द्र कुमार मिश्रा से बहस हो गयी।अब आपको इस बीच की एक तस्वीर दिखाते हैं जिसमें विधायक शशांक त्रिवेदी और पूर्व विधायक अनूप गुप्ता अगल-बगल में बैठे हैं जो उन लोगों  को आइना दिखाती है जो अपने-अपने दलों और नेताओं के लिए लड़ जाया करते हैं। दरअसल एक तरफ अनूप गुप्ता बैठे थे तो दूसरी तरफ शशांक त्रिवेदी। अनूप गुप्ता जहां बैठे थे वहीं शशांक त्रिवेदी भी पहुंच गए और पीडीए को लेकर दोनों के तरकश से तीर चलने लगे। फिलहाल गांव के लोग उस दिन का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं जिस दिन लाइट आएगी।

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